Friday, 24 January 2014

गोविन्दपुरी



आज कल दिल्ली के गोविन्दपुरी में रहने लगा हूँ।यहाँ घनी और पतली गलियां हैं।घरों के नंबर बड़ी बेतरतीबी से फैले हुए हैं।मकान नंबर 1296 के बाद 1345 क्यों है बाकी के घर किस गली में घुसे हुए हैं? इसका जवाब आपको स्वयं ब्रम्हा भी नहीं दे सकते है।डेल्ही में अंग्रेजी के शब्द "mess" या "disorder" को "भसड" कहते हैं। तो ये कह सहते हैं कि गोविन्दपुरी में भसड मची है।केवल राहत की बात ये है की पानी की समस्या नहीं है।

यहाँ बडे विचित्र वेशभूषा में मकान मालिक के लड़के घूमते हैं।कसी हुई पतलून की जगह पालिका बाजार से लेवाईस का डुप्लीकेट। टीशर्ट में लिखा हुआ होता है "कूल एंड केयर लेस"।मेहँदी लगाकर धुप में बाल सुखाते हैं बाल सुरमई करने के लिए। ओजोन परत को छेदती आ रही सूरज की किरणे और मेहँदी के मिलन से सुरमई। यही मनचले अक्सर सलून के सामने बाल बाउंस कर के सेट करते नजर आ जाते हैं।
शायद हम किरायेदारों के पैसे इन्ही की साज-सज्जा में खर्च होते हैं।
ये लड़के अपनी बाइक्स और कार में हेलोजेन्न- नियोन लाइट लगा कर डेल्ही भर में घूमतेे हैं।gym जाते हैं प्रोटीन शेक पीते हैं। रिंगटोन हनी सिंह का होना अनिवार्य होता हैं।शाम को जब मैं थक कर घर आता हूँ तो इन्हें देख कर गुस्सा नहीं आता दया आती है।भगवान् को धन्यवाद करता हूँ ।कि मूझे इनकी तरह नामा"कूल " नहीं बनाया।

2 comments:

  1. last line "भगवान् को धन्यवाद करता हूँ ।कि मूझे इनकी तरह नामा"कूल " नहीं बनाया।" was heart touching..
    Thank You God :)

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