बढ़ते तो शरीर से हैं
मगर मन से
बच्चे ही तो हैं।
मगर मन से
बच्चे ही तो हैं।
अकेले सब माँ बाप से दूर हैं।
मगर अँधेरे में जाने से डरते हैं।
किसी बच्चे को देख कर
पागलो सा चेहरा बना कर हँसाते हैं।
आज भी पुअराना कार्टून मूवी
Youtube में महाभारत,देख भाई देख ,हम पांच
लगा कर weekend गुज़ारते हैं।
सड़क खेलते बच्चों की
फूटबाल आ जाए तो बैकहम स्टाइल में पास देकर
गेंद लौटाते हैं।
ग्राउंड में क्रिकेट खेल रहे बच्चों का गेम रोक कर ट्रॉयल बाल कर आते हैं।
बारिश में बाहर सूखते कपड़ो को उठाने के बहाने भीग आते है।
गीली मिट्टी की ख़ुशबू में यूँ ही खो जाते हैं।
पुराने गाने आज भी प्ले लिस्ट में फवोरेट में लगाते हैं।
घर बैठे माँ-बाप न्यूज़ चैनल में हमारे शेहेर का ठंडी में गिरता पारा देख कर फ़ोन पर स्वेटर पहनना याद दिलाते हैं।
आइसक्रीम खाने के बाद बची कप की आइस क्रीम डायरेक्ट जीभ से चाट जाते हैं।
घर में रखे नर्सरी क्लास का 99% वाले रिजल्ट को घंटो निहारते हैं।
ट्रेन में टाइम पास के लिए चिड़िया उड़ खेलने लग जाते हैं।
दोस्तों को आज भी उनके स्कूल या कॉलेज में बनाये हुए नाम से पुकारते है।
मगर अँधेरे में जाने से डरते हैं।
किसी बच्चे को देख कर
पागलो सा चेहरा बना कर हँसाते हैं।
आज भी पुअराना कार्टून मूवी
Youtube में महाभारत,देख भाई देख ,हम पांच
लगा कर weekend गुज़ारते हैं।
सड़क खेलते बच्चों की
फूटबाल आ जाए तो बैकहम स्टाइल में पास देकर
गेंद लौटाते हैं।
ग्राउंड में क्रिकेट खेल रहे बच्चों का गेम रोक कर ट्रॉयल बाल कर आते हैं।
बारिश में बाहर सूखते कपड़ो को उठाने के बहाने भीग आते है।
गीली मिट्टी की ख़ुशबू में यूँ ही खो जाते हैं।
पुराने गाने आज भी प्ले लिस्ट में फवोरेट में लगाते हैं।
घर बैठे माँ-बाप न्यूज़ चैनल में हमारे शेहेर का ठंडी में गिरता पारा देख कर फ़ोन पर स्वेटर पहनना याद दिलाते हैं।
आइसक्रीम खाने के बाद बची कप की आइस क्रीम डायरेक्ट जीभ से चाट जाते हैं।
घर में रखे नर्सरी क्लास का 99% वाले रिजल्ट को घंटो निहारते हैं।
ट्रेन में टाइम पास के लिए चिड़िया उड़ खेलने लग जाते हैं।
दोस्तों को आज भी उनके स्कूल या कॉलेज में बनाये हुए नाम से पुकारते है।
सच बात है।
बढ़ते तो हम शरीर से हैं
मगर मन से बच्चे ही तो हैं।
बढ़ते तो हम शरीर से हैं
मगर मन से बच्चे ही तो हैं।
No comments:
Post a Comment